यह लोकप्रिय गणेश आरती हर शुभ कार्य की शुरुआत में और गणेश चतुर्थी के दौरान प्रतिदिन गाई जाती है।
🪔 जय गणेश जय गणेश देवा
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी॥
पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
🙏 पाठ के लाभ और विधि
गणेश जी विघ्नहर्ता हैं; किसी भी नई शुरुआत से पहले यह आरती गाई जाती है।
अंतिम अपडेट: 3 नव॰ 2026