Thought of the Day
Friday, 4 December 2026 · Margashirsha Krishna Ekadashi · Vikram Samvat 2083
Thought of the Day
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।— Bhagavad Gita 2.48
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥
Meaning: सफलता और असफलता में समान भाव रखना ही योग है।
Thoughts from previous days
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान।
तुलसी दया न छाँड़िए, जब लग घट में प्रान॥
तुलसी मीठे बचन ते, सुख उपजत चहुँ ओर।
बसीकरन इक मंत्र है, परिहरु बचन कठोर॥
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