Om Jai Jagdish Hare is the most widely sung Hindu aarti, written by Pandit Shardha Ram Phillauri in the 1870s. It is sung at the end of almost every puja.
🪔 Om Jai Jagdish Hare
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी, स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे, स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
🙏 Benefits & How to Recite
Singing this aarti with a ghee lamp after puja brings peace to the home and devotion to the heart.
Last updated: 3 Nov 2026