🔺 मांगलिक दोष जाँच
लग्न, चंद्र और शुक्र – तीनों से मंगल की स्थिति देखकर मांगलिक दोष और उसका परिहार जानें।
मांगलिक दोष क्या है?
जन्म कुंडली में मंगल लग्न से पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो तो व्यक्ति मांगलिक कहलाता है। दक्षिण भारत में दूसरा भाव भी गिना जाता है। मंगल ऊर्जा और साहस का ग्रह है, इसलिए इन भावों में यह स्वभाव में उग्रता ला सकता है। मांगलिक होना कोई अभिशाप नहीं है – लगभग हर तीसरी कुंडली मांगलिक होती है और शास्त्रों में इसके कई परिहार बताए गए हैं।