📍 आपके शहर के अनुसार मुहूर्त का सटीक समय
विवाह मुहूर्त – नवंबर 2026
| दिनांक | वाराणसी में समय | नक्षत्र | तिथि | वाराणसी का पंचांग |
|---|---|---|---|---|
| 21 नव॰, शनि | सुबह 6:36 – रात 11:36 | रेवती | द्वादशी | सूर्योदय सुबह 6:19 अभिजीत सुबह 11:22 – दोपहर 12:05 राहुकाल सुबह 9:01 – सुबह 10:22 (टालें) |
| 24 नव॰, मंगल | रात 11:02 – रात 11:36 | रोहिणी | प्रतिपदा | सूर्योदय सुबह 6:21 अभिजीत सुबह 11:23 – दोपहर 12:06 राहुकाल दोपहर 2:26 – दोपहर 3:47 (टालें) |
| 25 नव॰, बुध | सुबह 6:39 – रात 11:36 | रोहिणी, मृगशिरा | प्रतिपदा, द्वितीया | सूर्योदय सुबह 6:22 राहुकाल सुबह 11:44 – दोपहर 1:05 (टालें) |
| 26 नव॰, गुरु | सुबह 6:40 – शाम 5:24 | मृगशिरा | द्वितीया, तृतीया | सूर्योदय सुबह 6:22 अभिजीत सुबह 11:23 – दोपहर 12:06 राहुकाल दोपहर 1:05 – दोपहर 2:26 (टालें) |
विवाह मुहूर्त – दिसंबर 2026
| दिनांक | वाराणसी में समय | नक्षत्र | तिथि | वाराणसी का पंचांग |
|---|---|---|---|---|
| 2 दिस॰, बुध | सुबह 10:09 – रात 11:36 | उत्तरा फाल्गुनी | नवमी, दशमी | सूर्योदय सुबह 6:27 राहुकाल सुबह 11:47 – दोपहर 1:07 (टालें) |
| 3 दिस॰, गुरु | सुबह 6:44 – सुबह 10:30 | उत्तरा फाल्गुनी, हस्त | दशमी | सूर्योदय सुबह 6:27 अभिजीत सुबह 11:26 – दोपहर 12:09 राहुकाल दोपहर 1:07 – दोपहर 2:27 (टालें) |
| 4 दिस॰, शुक्र | सुबह 6:45 – सुबह 9:59 | हस्त | एकादशी | सूर्योदय सुबह 6:28 अभिजीत सुबह 11:26 – दोपहर 12:09 राहुकाल सुबह 10:28 – सुबह 11:48 (टालें) |
| 5 दिस॰, शनि | सुबह 11:25 – रात 11:36 | स्वाती | द्वादशी, त्रयोदशी | सूर्योदय सुबह 6:29 अभिजीत सुबह 11:27 – दोपहर 12:09 राहुकाल सुबह 9:08 – सुबह 10:28 (टालें) |
| 6 दिस॰, रवि | सुबह 6:46 – सुबह 7:19 | स्वाती | त्रयोदशी | सूर्योदय सुबह 6:30 अभिजीत सुबह 11:27 – दोपहर 12:10 राहुकाल दोपहर 3:48 – शाम 5:07 (टालें) |
| 12 दिस॰, शनि | सुबह 6:50 – रात 11:36 | उत्तराषाढ़ा | तृतीया, चतुर्थी | सूर्योदय सुबह 6:34 अभिजीत सुबह 11:30 – दोपहर 12:12 राहुकाल सुबह 9:12 – सुबह 10:32 (टालें) |
मुहूर्त का समय आपके शहर और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है। अंतिम समय अपने पुरोहित से अवश्य पूछें।
विवाह मुहूर्त के बारे में
विवाह मुहूर्त हिंदू विवाह के लिए चुना गया शुभ समय है। पंडित अनुकूल तिथि, स्थिर या सौम्य नक्षत्र (जैसे रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा या रेवती), अच्छा लग्न और भद्रा जैसे दोषों का अभाव देखते हैं।
चातुर्मास, खरमास (सूर्य के धनु या मीन राशि में होने पर) या शुक्र अथवा गुरु के अस्त होने पर आमतौर पर विवाह नहीं होते। यहाँ दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के अनुसार हैं; मुहूर्त को हमेशा वर-वधू की कुंडली से मिलाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चातुर्मास में विवाह क्यों नहीं होते?
मान्यता है कि चातुर्मास में भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं, इसलिए इस अवधि में परंपरागत रूप से विवाह नहीं होते।